गुरुवार, 1 नवंबर 2012

छत्तीसगढ़ महिमा

सुमिरौं देवी देवता, करौं तोला प्रनाम।
छत्तिसगढ़-महिमा जानौ, हवे इहें चारो धाम।।
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जय जय छत्तीसगढ़ महतारी। जन जन जन के तंय दुःख हारी।।
दूर दराज ले मानुष आथे। ओला छत्तिसगढ़ भा जाथे।।
छत्तिसगढ़िया के मुख्य चिन्हारी। जोतै नांगर धरै तुतारी।।
पहुना-पूजा धरम निभावै। भूख मरत कउनो नहि जावैं ।।
 भुइयां तोर हे बड़ उपजाऊ। हवय बड़ा पूँजी बरसाऊ।।   
धान कटोरा तंही कहाथस। नाना किसिम-धान उपजाथस।।
                                  क्रमशः ......
जय जोहार .........

3 टिप्‍पणियां:

  1. दू उपराहा , आधा कोरी
    बछर बीतगे , बाँट खुरोरी |
    दिया बार दौ ओरी - ओरी
    चलो फटाका,फुलझरी फोरी |
    ठेठरी ,खुरमी, बरा राँधबो
    अँचरा मा बस मया बाँधबो |
    धान कटोरा चमचम चमकै
    खेत -खार खुसहाली गमकै |
    परन करन हम छत्तीसगढ़िया
    रहिबो जग मा सबले बढ़िया |

    जय जोहार.............


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    1. अरुण भाई तव प्रेरणा, लिख पायेंव आखर चार।

      चालीसा बर शेष हे, चौंतिस करना पार।।

      पढ़ेंव टिपण्णी आपके, बाढिस मोर उत्साह।

      "धन्यवाद" स्वीकार करौ, देवत रइहु सलाह।।

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  2. पूरब मा सारंगढ़ साजे
    नाँदगाँव पच्छिम म बिराजे |
    उत्ती मा सरगुजा सरसथे
    दक्खिन बस्तर मया बरसथे |
    दक्खिन कोसल इही कहाथे
    बालमिकी के सुरता आथे |
    रतनपूर जुन्ना रजधानी
    महानदी के निर्मल पानी |
    सूर्यकांत तयँ कलम सिपाही
    कबिता सरसर निकरत जाही |
    चालीसा के बात का भाई
    लिख देबे सौ ठिन चौपाई |

    जय जोहार............






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